Sunday, September 22, 2013

तुम

बाद बरस ये रात आयी है, जैसे सपनो से जाग, फिर नींद आयी है
कहने को तो हम जागते रहे हैं, फिर अब क्यों याद, वो बात आयी है

जागती आँखों से देखे सपने तो याद हैं, वो चेहरा, शायद नींद में देखा होगा
धुंधलके में चमकता वो सितारा, ना, शायद चाँद उतर आया होगा

जो खनकने की आवाज गूंज रही है, अभी भी, ये लरियाँ कुछ तो कहेंगी
तेरी जिस खूशबू ने बाँध रखा है, आज, जान मेरी ले के रहेंगी ।


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